भारत का विभाजन (1947)

भारत का विभाजन (india partition) इतिहास की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक था। यह विभाजन एक भौगोलिक विभाजन नहीं था, बल्कि सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक स्तर पर गहरे घाव छोड़ गया। 15 अगस्त सन.1947 को जब भारत अंग्रेजों से आजाद हुआ, उसी समय भारत को दो भागों में बाँट दिया गया पहला भारत और दूसरा पाकिस्तान। यह विभाजन मुख्य रूप से धार्मिक आधार पर किया गया था, जहाँ पाकिस्तान को मुस्लिम बहुल क्षेत्र और भारत को बहुसंख्यक हिंदू क्षेत्रों के रूप में स्थापित किया गया।

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वर्ष / तिथि घटना विवरण
1940 लाहौर प्रस्ताव मुस्लिम लीग ने अलग राष्ट्र की माँग रखी
जून 1947 माउंटबेटन योजना भारत को दो भागों में बाँटने की घोषणा
14-15 अगस्त 1947 स्वतंत्रता और विभाजन भारत और पाकिस्तान दो स्वतंत्र राष्ट्र बने
1947-48 दंगे और पलायन लगभग 1.5 करोड़ लोग विस्थापित, लाखों की मृत्यु
1971 बांग्लादेश का गठन पूर्वी पाकिस्तान अलग होकर नया देश बना

भारत विभाजन का कारण

ब्रिटिश शासन के समय से ही हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच मतभेद होने लगे थे। अंग्रेजों ने "फूट डालो और राज करो" की नीति अपनाई, जिसके परिणामस्वरूप दोनों समुदायों के बीच मतभेद बढ़ते गये और अविश्वास बढ़ता गया। सन. 1906 में मुस्लिम हितों की रक्षा के लिए मुस्लिम लीग का गठन किया गया था। सन. 1930 में मोहम्मद अली जिन्ना ने मुसलमानों के लिए एक अलग राष्ट्र की माँग उठाई थी। अखिल भारतीय मुस्लिम लीग ने सन. 1940 का लाहौर प्रस्ताव अपनाया था, जिसमें ये प्रस्ताव रखा गया कि मुसलमानों के लिए एक अलग देश जरूरी है।

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब अंग्रेज (ब्रिटिश सरकार) कमजोर पढ़ गई तो उसने भारत छोड़ने का निर्णय लिया, लेकिन भारत को सत्ता सौंपने के साथ-साथ विभाजन से एक अलग राष्ट्र की माँग का सवाल भी उठ खड़ा हुआ। अंततः जून सन. 1947 की माउंटबेटन योजना के तहत भारत का विभाजन (partition of india) तय किया गया। ब्रिटिश सरकार ने जल्दबाज़ी में माउंटबेटन योजना (Mountbatten Plan) के परिणामस्वरूप लाखों लोग विस्थापित हुए, सांप्रदायिक दंगे हुए और बड़ी संख्या में जनहानि हुई। यह विभाजन पंजाब और बंगाल प्रांतों को बाँटकर किया गया था। पाकिस्तान दो हिस्सों में बना – पश्चिम पाकिस्तान (आज का पाकिस्तान) और पूर्वी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश, जो 1971 में स्वतंत्र हुआ)। 15 अगस्त सन.1947 को भारत अंग्रेजों से स्वतंत्र हुआ था और पाकिस्तान 14 अगस्त को विभाजन के दौरान अलग हो गया।

विभाजन की प्रक्रिया

विभाजन के लिए सीमाओं को तय करने का काम ब्रिटिश न्यायाधीश सर रेडक्लिफ को सौंपा गया। उन्होंने पंजाब और बंगाल को धार्मिक आधार पर बाँटने का निर्णय लिया।

  • पंजाब को दो हिस्सों में बाँटा गया – पश्चिमी पंजाब पाकिस्तान में गया और पूर्वी पंजाब भारत के हिस्से में आया।
  • बंगाल को भी विभाजित किया गया – पूर्वी बंगाल पाकिस्तान का हिस्सा बना और पश्चिम बंगाल भारत में रहा।
  • सिंध और बलूचिस्तान को पाकिस्तान में शामिल किया गया।
  • असम और बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में भी कई जिलों को विभाजित किया गया।

विभाजन के परिणाम

भारत का विभाजन बहुत हिंसक रहा। लगभग 1.5 करोड़ लोग अपनी ज़मीन-जायदाद छोड़कर शरणार्थी बन गए। हिंदू और सिख पाकिस्तान से भारत आए, जबकि मुसलमान भारत से पाकिस्तान चले गये। भारत के विभाजन के समय सांप्रदायिक भीषण दंगे हुए। इन दंगों में लगभग 10 से 15 लाख लोगों की हत्या हुई थी। महिलाओं पर अत्याचार, अपहरण और यौन उत्पीड़न किया गया। विभाजन के बाद कश्मीर मुद्दा भी उठने लगा, जो आज तक भारत-पाकिस्तान संबंधों में तनाव का कारण बना हुआ है।

भारत एक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र के रूप में उभरा, जबकि पाकिस्तान एक इस्लामी राष्ट्र बना। भारत का विभाजन 1947 की घटना ही नहीं थी, बल्कि इसके प्रभाव को आज भी देखा जा सकता है। भारत और पाकिस्तान के बीच कई युद्ध हुए – 1947 का युद्ध, 1965 का युद्ध, 1971 का युद्ध और 1999 का युद्ध में। विशेष रूप से 1971के युद्ध में पाकिस्तान का पूर्वी हिस्सा अलग होकर बांग्लादेश बना।

विभाजन के समय क्या-क्या बंटवारा हुआ?

भारत का विभाजन सिर्फ सीमाओं का नहीं, बल्कि हर चीजों का बँटवारा हुआ था। देश दो हिस्सों - भारत और पाकिस्तान में बँटा, जिसमें पंजाब और बंगाल के प्रांतों को विभाजित किया गया। लगभग 1.5 करोड़ लोग अपने घर-बार छोड़ने पर मजबूर हो गये। सेना, रेलवे, फैक्ट्रियाँ, सरकारी संपत्ति, हथियारों, रेलवे और डाक विभाग का भी बँटवारा हुआ। पाकिस्तान को लगभग 90 करोड़ रुपये और 17.5% मुद्रा दी गई। सांप्रदायिक दंगों और पलायन के कारण लाखों लोगों की मृत्यु हुई और परिवार हमेशा के लिए बिछड़ गए।

विभाजन के समय मुख्य व्यक्ति कौन-कौन थे?

विभाजन के समय मुख्य व्यक्ति – लॉर्ड माउंटबेटन, जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, मोहम्मद अली जिन्ना, लियाकत अली खान और सर रेडक्लिफ।

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नीचे दी गई तालिका में भारत के विभाजन के समय प्रमुख व्यक्तियों के नाम और उनकी भूमिका संक्षेप में दी गई है।

नाम भूमिका
लॉर्ड माउंटबेटन भारत के अंतिम ब्रिटिश वायसराय, माउंटबेटन योजना के प्रस्तुतकर्ता
जवाहरलाल नेहरू कांग्रेस के नेता, स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री
महात्मा गांधी अहिंसा और एकता के समर्थक, विभाजन का विरोध किया लेकिन शांति बनाए रखने का प्रयास
सरदार वल्लभभाई पटेल कांग्रेस नेता, स्वतंत्र भारत के पहले गृहमंत्री, रियासतों के विलय में महत्वपूर्ण भूमिका
मोहम्मद अली जिन्ना मुस्लिम लीग के अध्यक्ष, पाकिस्तान के संस्थापक और पहले गवर्नर-जनरल
लियाकत अली खान मुस्लिम लीग नेता, पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री
सर रेडक्लिफ ब्रिटिश न्यायाधीश, भारत-पाक सीमा तय करने वाले (रेडक्लिफ रेखा)

भारत का विभाजन (FAQs)

भारत का विभाजन कब हुआ था?:::भारत का विभाजन 15 अगस्त 1947 को हुआ था भारत का विभाजन क्यों किया गया था?:::धार्मिक आधार पर विभाजन की योजना किसके नाम से जानी जाती है?:::माउंटबेटन योजना भारत के विभाजन की रेखा किसने खींची थी?:::सर रेडक्लिफ विभाजन का सबसे बड़ा परिणाम क्या था?:::साम्प्रदायिक दंगे, भारी पलायन और भारत-पाक के बीच स्थायी तना

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