विलय पत्र (कानूनी दस्तावेज) | Instrument of Accession

विलय पत्र क्या है?

विलय पत्र (Instrument of Accession) एक कानूनी/औपचारिक समझौता "दस्तावेज" है। ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र होने के बाद सरदार वल्लभभाई पटेल और वी.पी. मेनन द्वारा तैयार किया गया था, जो भारत की आजादी के बाद रियासतों के शासकों से भारतीय संघ में शामिल होने के लिए इस पत्र पर हस्ताक्षर किये थे, जिसमें रक्षा, विदेश निति और संचार जैसे क्षेत्रों में भारत सरकार को अधिकार दिए जाते थे। विलय पत्र पर हस्ताक्षर करने के बाद, रियासत कानूनी रूप से भारत का हिस्सा हो जाती थी। यह कानून भारत के राजनीतिक एकीकरण में एक महत्वपूर्ण कदम था।

विलय पत्र का उद्देश्य क्या था?

विलय पत्र का कानूनी आधार भारत सरकार अधिनियम 1935 था, यह दस्तावेज सभी रियासतों के शासकों को स्वतंत्रता के बाद ब्रिटिश भारत के विभाजन के परिणामस्वरूप बनाए गए भारत और पाकिस्तान में शामिल होने का विकल्प देता था। इस पत्र पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद रियासतें कानूनी रूप से भारत या पाकिस्तान का हिस्सा बन जाती थी।

जो रियासतें भारतीय संघ में शामिल होती थीं इस पत्र पर शासकों द्वारा हस्ताक्षर किए जाने पर उन्हें शासक रक्षा, विदेश मामलों और संचार के क्षेत्रों में भारत सरकार को अधिकार सौंपते थे, जबकि अन्य मामलों में रियासतें अपनी स्वशासन का अधिकारी बनाए रखती थीं। इस विलय पत्र दस्तावेज पर हस्ताक्षर करके शासकों ने भारत के राजनीतिक एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिससे भारतीय राष्ट्र-राज्य के बनाने में मदद मिली।

विलय पत्र से अधिकार

विलय पत्र से भारत सरकार को तीन विषयों पर अधिकार दिया गया:-

  1. रक्षा (Defence)
  2. विदेश नीति (External Affairs)
  3. संचार (Communication)

कितनी रियासतें कहाँ-कहाँ शामिल हुईं?

आजादी के समय भारत में लगभग 562 से 565 रियासतें थीं, जिसमें कुछ रियासतें स्वतंत्र रहना चाहती थीं और बाकि रियासतें भारत या पाकिस्तान में शामिल हो गईं। सन.1955 तक 13 रियासतें पाकिस्तान में और बाकि रियासतें भारत संघ में शामिल हो गईं। रियासतों के शासकों ने इन प्रांतों में शामिल होने के लिए विलय पत्र पर हस्ताक्षर किये। सबसे पहले भोपल, पटियाला, बड़ौदा जैसी बड़ी रियासतों ने भारतीय संघ में शामिल होने के लिए हस्ताक्षर किए थे। जो रियासतें स्वतंत्र रहना चाहती थीं जैसे- हैदराबाद, जूनागढ़ और कश्मीर ने शुरू में विलय नहीं किया, लेकिन बाद अपने राज्य के लिए खतरे और आक्रमणों से बचाने क लिए उन्होंने भारत में शामिल होने के लिए विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए।

जम्मू और कश्मीर का उदाहरण

जम्मू और कश्मीर के शासक महाराजा हरि सिंह किसी भी प्रांत में शामिल नहीं होना चाहते थे और स्वतंत्र रहना चाहते थे, लेकिन पाकिस्तान के आक्रमण से अपने राज्य के को बचाने के लिए महाराजा हरि सिंह ने अक्टूबर 1947 में विलय पत्र पर हस्ताक्षर किए थे।

इन रियासतों का भारतीय संघ में शामिल होने के बाद भारत में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की स्थापना की गई।

📌 संक्षेप में:

  • विलय पत्र तैयार करने वाले: सरदार पटेल वल्लभभाई और वी.पी. मेनन।
  • तैयारी का समय: जून–जुलाई 1947 में बनाया गया, जब अंग्रेज़ों ने यह स्पष्ट कर दिया था कि 15 अगस्त को सत्ता भारत और पाकिस्तान को सौंपी जाएगी।
  • उद्देश्य क्या था: रियासतों का भारत या पाकिस्तान में शांतिपूर्ण विलय होना।

विलय पत्र (FAQs)

1) विलय पत्र क्या है?:::विलय पत्र एक कानूनी/औपचारिक समझौता दस्तावेज है। 2) विलय पत्र पर कितनी रियासतों ने हस्ताक्षर किए गए थे?:::सभी रियासतों ने। 3) जम्मू और कश्मीर की रियासत पर किसका शासन था?:::महाराजा हरि सिंह का। 4) भारत के पहले गृह मंत्री और उप-प्रधानमंत्री कौन था?:::सरदार वल्लभभाई पटेल थे। 5) वी.पी. मेनन कौन थे?:::भारत सरकार के सचिव।

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