कैबिनेट मिशन योजना (Cabinet Mission Plan) भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक बहुत महत्वपूर्ण चरण था। इसे ब्रिटिश सरकार ने भारत की आज़ादी और सत्ता भारत को सौंपने की प्रक्रिया को तय करने के लिए भेजा था।
| विषय | विवरण |
|---|---|
| भेजे जाने का वर्ष | मार्च 1946 |
| सदस्य | लॉर्ड पैथिक-लॉरेन्स, सर स्टैफर्ड क्रिप्स, ए.वी. एलेक्ज़ेंडर |
| मुख्य उद्देश्य | भारत में सत्ता हस्तांतरण, संविधान सभा का गठन, हिंदू-मुस्लिम विवाद का समाधान |
| संविधान सभा | 389 सदस्यीय सभा, प्रांतीय विधानसभाओं से निर्वाचित |
| केंद्र के विषय | विदेश नीति, रक्षा, संचार |
| समूह योजना (Grouping) | Group A: हिंदू बहुल प्रांत (UP, बिहार, बॉम्बे, मद्रास आदि) Group B: मुस्लिम बहुल उत्तर-पश्चिम प्रांत (पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान, NWFP) Group C: बंगाल और असम |
| पाकिस्तान की माँग | अस्वीकार की गई |
| कांग्रेस की प्रतिक्रिया | समूह योजना का विरोध किया |
| मुस्लिम लीग की प्रतिक्रिया | पहले समर्थन किया, बाद में विरोध और 'Direct Action Day' (16 अगस्त 1946) मनाया |
| परिणाम | संविधान सभा बनी (9 दिसम्बर 1946), मुस्लिम लीग ने भाग नहीं लिया, आगे चलकर भारत विभाजन (1947) हुआ |
कैबिनेट मिशन इतिहास
भारत को अंग्रेजों से आजादी पाने के लिये ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारत छोड़ो आंदोलन (सन. 1942) के बाद स्वतंत्रता की माँग बहुत तेज हो गई थी। ब्रिटिश शासन को भारत से समाप्त करने की मांग को लेकर शुरू किया गया एक जन आंदोलन था। द्वितीय विश्व युद्ध (1939–1945) के बाद ब्रिटिश सरकार आर्थिक और राजनीतिक रूप से कमजोर हो गई थी। कांग्रेस और मुस्लिम लीग के बीच अलग देश बनाने को लेकर मतभेद होने लगे थे – कांग्रेस संयुक्त भारत चाहती थी, जबकि मुस्लिम लीग (जिन्ना के नेतृत्व में) एक अलग देश (पाकिस्तान) बनाने की माँग करने लगी थी। इस परिस्थिति में ब्रिटिश सरकार ने मार्च सन. 1946 में कैबिनेट मिशन योजना के तहत तीन सदस्यों को भारत भेजा गया।
भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में सन. 1946 का कैबिनेट मिशन (Cabinet Mission) बहुत महत्वपूर्ण था। यह ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत की आज़ादी और सत्ता भारत को सौंपने की रूपरेखा तैयार करने के उद्देश्य से भेजा गया था। इस मिशन का लक्ष्य भारत का संविधान निर्माण की प्रक्रिया शुरू करना और हिंदू-मुस्लिम विवाद का समाधान निकाल कर एक एकीकृत भारत का उद्देश्य था। कांग्रेस ने भारत के एकीकृत का समर्थन किया और विभाजन का विरोध किया। मुस्लिम लीग ने इस मिशन में भाग लिया लेकिन बाद में विरोध किया जिसके परिणामस्वरूप सांप्रदायिक दंगे हुए। कैबिनेट मिशन ने पाकिस्तान की मांग को अव्यावहारिक बताते हुए उसे अस्वीकार कर दिया जिसके चलते कैबिनेट मिशन विफल हो गया। कैबिनेट मिशन विफल होने के बाद मुस्लिम लीग द्वारा "सीधी कार्यवाही" (Direct Action Day) की घोषणा कर 16 अगस्त सन. 1946 को कोलकाता में दंगे शुरु हो गये, जिसे कलकत्ता दंगा या कलकत्ता हत्याकांड कहते हैं। मुस्लिम लीग ने 'सीधी कार्रवाई' अभियान चला कर एक अलग राष्ट्र बनाने की माँग को तत्काल स्वीकार करने के लिए देश में दंगे किये, जिसके परिणामस्वरूप भारत का विभाजन हो गया और दो अलग-अलग देश भारत - पाकिस्तान बन गये।
ब्रिटिश सरकार ने भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 पारित किया और ब्रिटिश शासन से आजादी मिली।
मिशन के उद्देश्य
- भारत में सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया तय करना।
- संविधान सभा का गठन करना।
- हिंदू-मुस्लिम विवाद हल निकालकर एकीकृत भारत की योजना बनाना।
प्रमुख प्रावधान
- संविधान सभा का गठन
- 389 सदस्यों की सभा का गठन।
- सदस्यों का चुनाव प्रांतीय विधानसभाओं द्वारा।
- संघीय संरचना
- भारत में एक संघीय ढांचा बनेगा।
- केंद्र के पास केवल तीन विषय रहेंगे – रक्षा, विदेश नीति और संचार।
- समूह योजना (Grouping Plan)
- भारत को तीन समूहों में बाँटा गया:
- Group A – हिंदू बहुल प्रांत (UP, बिहार, बॉम्बे, मद्रास आदि)
- Group B – मुस्लिम बहुल उत्तर-पश्चिम प्रांत (पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान, NWFP)
- Group C – मुस्लिम बहुल पूर्वी प्रांत (बंगाल और असम)
- भारत को तीन समूहों में बाँटा गया:
- पाकिस्तान की माँग
- मुस्लिम लीग द्वारा उठाई गई पाकिस्तान की माँग को अस्वीकार कर दिया गया।
निष्कर्ष
कैबिनेट मिशन योजना के तहत भारत की स्वतंत्रता के लिये किया गया था। इस योजना का उद्देश्य एक ये भी था कि भारत को एकजुट रखना, लेकिन कांग्रेस और मुस्लिम लीग के मतभेदों के कारण यह विफल रही। कैबिनेट मिशन के तहत संविधान सभा गठन हो गया था, किंतु अंततः यही घटनाक्रम भारत के विभाजन और स्वतंत्रता (1947) का आधार बना।
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