सन. 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध (Bangladesh Liberation War) जिसे तीसरा भारत-पाकिस्तान युद्ध से भी जानते हैं, जिसके परिणामस्वरूप पाकिस्तान दो हिस्सों में बंट गया पश्चिमी पाकिस्तान (पाकिस्तान) और पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश)।
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| युद्ध का नाम | 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध (Bangladesh Liberation War) |
| अवधि | 3 दिसंबर 1971 – 16 दिसंबर 1971 (13 दिन) |
| मुख्य कारण | पूर्वी पाकिस्तान में राजनीतिक और सांस्कृतिक भेदभाव, चुनावी परिणाम न मानना, दमनकारी नीतियाँ |
| प्रमुख घटनाएँ | ऑपरेशन सर्चलाइट, शरणार्थियों का भारत आना, भारतीय सेना का हस्तक्षेप |
| परिणाम | पाकिस्तान की हार, 93,000 सैनिकों का आत्मसमर्पण, बांग्लादेश का गठन |
| महत्व | दक्षिण एशिया का भू-राजनीतिक नक्शा बदला, भारत की सैन्य शक्ति स्थापित हुई |
युद्ध की शुरुआत
पाकिस्तान का गठन 1947 में भारत के विभाजन से हुआ था, जिसमें दो हिस्से थे – पश्चिमी पाकिस्तान (पाकिस्तान) और पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश)। दोनों हिस्सों के बीच भौगोलिक दूरी थी और सांस्कृतिक, भाषाई तथा राजनीतिक भिन्नताओं के कारण असमानता बढ़ती चली गई। पूर्वी पाकिस्तान की जनता पर पश्चिमी पाकिस्तान की सरकार ने राजनीतिक और आर्थिक शोषण करना शुरू कर दिया था राजनीतिक तानाशाही से तंग आकर स्वतंत्रता की मांग कर रहे थे। 1971 में शेख मुजीबुर रहमान की पार्टी आवामी लीग को चुनाव में बहुमत मिली, लेकिन पश्चिमी पाकिस्तान ने सत्ता सौंपने से इनकार कर दिया और इसके बाद पूर्वी पाकिस्तान में आंदोलन और विद्रोह शुरू हुआ। 25 मार्च 1971 को पाकिस्तानी सेना ने "ऑपरेशन सर्चलाइट" चलाकर "पूर्वी पाकिस्तान" के ढाका और अन्य जगहों पर नरसंहार करना शुरू कर दिया था। इसके चलते लाखों लोग शरणार्थी बनकर भारत आ गए। भारत ने मानवता और सुरक्षा कारणों से शरणार्थियों की मदद की और बांग्लादेश की स्वतंत्रता (Bangladesh Liberation War) सेनाओं (मुक्ति वाहिनी) को समर्थन दिया। 3 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान ने "ऑपरेशन चंगेज खान" के तहत भारतीय हवाई अड्डों पर हमला कर दिया, जिसके कारण भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध करने की घोषणा की और युद्ध में भारत आधिकारिक तौर पर पूर्वी पाकिस्तान के स्वंत्रता में शामिल हो गया।
भारत-पाकिस्तान युद्ध (Indo-Pakistani war of 1971)
यह युद्ध सिर्फ दो देशों के बीच नहीं था बल्कि मानवीय अधिकारों, स्वतंत्रता और आत्मनिर्णय की लड़ाई का प्रतीक भी था। यह युद्ध पूर्वी पाकिस्तान में मुक्ति वाहिनी के संघर्ष से जुड़ा था, जिसे भारत ने समर्थन दिया था। 1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध (बांग्लादेश स्वतंत्रता संग्राम) 3 दिसंबर 1971 से 16 दिसंबर 1971 तक चला था और इसमें भारत की निर्णायक जीत हुई थी। 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तान के लगभग 93,000 सैनिकों ने ढाका में भारतीय सेना के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। जिसके परिणामस्वरुप पूर्वी पाकिस्तान (बांग्लादेश) एक नए राष्ट्र के रूप में जन्म हुआ।
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