नालन्दा (Nalanda) बिहार राज्य का एक ऐतिहासिक जिला है। इसका मुख्यालय बिहार शरीफ है। यहाँ पर कई प्रसिद्ध ऐतिहासिक व सांस्कृतिक स्थल हैं, जैसे – नालन्दा महाविहार (महान विहार या बौद्ध मठ), राजगीर, ग्रिधकूट पर्वत, और सोन भंडार गुफाएँ। बौद्ध धर्म और जैन धर्म – दोनों का यह क्षेत्र प्रमुख केंद्र रहा है। वर्तमान में यह जिला शिक्षा, पर्यटन और धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।
मुख्य तथ्य तालिका
| विषय | प्राचीन नालंदा | आधुनिक नालंदा विश्वविद्यालय |
|---|---|---|
| स्थापना | 427 ई. (गुप्त काल) | 2010 अधिनियम, 2014 में शैक्षणिक संचालन प्रारंभ |
| स्वरूप | आवासीय विश्वविद्यालय | अनुसंधान-आधारित इंटरडिसिप्लिनरी संस्थान |
| छात्र–शिक्षक | 10,000 विद्यार्थी, ~2,000 शिक्षक | 21 देशों से 400+ नियमित छात्र |
| प्रमुख विषय | बौद्धधर्म, दर्शन, गणित, आयुर्वेद आदि | बौद्ध अध्ययन, पर्यावरण, दर्शन, गणित, हिंदी, अर्थशास्त्र आदि |
| वैश्विक योगदान | एशियाई बुद्धिशास्त्र का केंद्र | वैश्विक अकादमिक साझेदारी और कार्यक्रम वृद्धि |
नालन्दा विश्वविद्यालय इतिहास
नालंदा विश्वविद्यालय (nalanda vishwavidyalaya) की स्थापना गुप्त सम्राट कुमारगुप्त प्रथम ने 5वीं शताब्दी ईस्वी में की थी। नालंदा विश्वविद्यालय शिक्षा का एक विशाल केंद्र था, जो मुख्य रूप से बौद्ध धर्म के लिए समर्पित था, लेकिन यहाँ अन्य धर्मनिरपेक्ष विषय भी पढ़ाए जाते थे। इसका क्षेत्रफल 30 एकड़ से अधिक में फैला हुआ था, इसमें 300 कमरे, 7 बड़े कक्ष और पढ़ने के लिये 9 मंजिला पुस्तकालय भी था, जिसमें 90 लाख से अधिक किताबें थीं। यह विश्व का पहला आवासीय विश्वविद्यालय माना जाता है। यहाँ एक समय पर 10,000 विद्यार्थी और 2,000 शिक्षक रहते थे। पाठ्यक्रम में बौद्ध दर्शन, साहित्य, गणित, खगोलशास्त्र, आयुर्वेद, तर्कशास्त्र आदि शामिल थे। चीन, जापान, कोरिया, श्रीलंका, तिब्बत और दक्षिण पूर्व एशिया से छात्र यहाँ शिक्षा प्राप्त करने आते थे।
नालंदा विश्वविद्यालय को लगभग 12वीं में तुर्क आक्रमणकारी बख्तियार खिलजी ने पुस्तकालय में आग लगा कर नष्ट कर दिया और लाखों ग्रंथ जल कर राख हो गये। इसकी आग इतनी भयानक थी कि लगभग 3 महीनों तक जलती रही थी।
यह स्थल यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (World Heritage Site) है।
पुनरुद्धार/आधुनिक नालन्दा विश्वविद्यालय (2010 – वर्तमान)
आधुनिक नालन्दा विश्वविद्यालय (nalanda university) को भारत सरकार द्वारा सन. 2010 में संसद से अधिनियम पास कर इसे पुनर्जीवित किया गया। 2014 में इसका पहला शैक्षणिक सत्र शुरू हुआ था। यह प्राचीन विश्वविद्यालय के पास में ही स्थित है। यहाँ पर कई विषय पढ़ाए जाते हैं, जैसे – इतिहास, पारिस्थितिकी, दर्शन, हिंदी, अर्थशास्त्र, गणित आदि। वर्तमान में 20+ देशों से छात्र यहाँ पढ़ाई करने आते हैं। सन. 2024 में इसका नेट-जीरो ग्रीन कैंपस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटित किया गया।
हमारी पोस्ट को पढ़ने के लिए धन्यवाद !.....
हम आशा करते हैं आपको हमारी पोस्ट अच्छी लगी होगी। अगर आप हमारे साथ कुछ शेयर करना चाहते हैं या इस पोस्ट के सम्बन्ध में हमें बताना चाहते है तो कमेंट (Comment) करें या मेल (onlinegkwala@gmail.com) करें और कांटेक्ट फॉर्म (Contact Form) के जरिये भी बता सकते हैं।
इस पोस्ट से सम्बंधित अपना फीडबैक जरूर दें !!...

0 टिप्पणियाँ
Have any questions or suggestions? Drop a comment below – we’ll reply as soon as possible!
Emojiआपका फीडबैक हमारे लिए अमूल्य है – इससे हमें और बेहतर कंटेंट देने की प्रेरणा मिलती है।