भारतीय थलसेना – भूमि सुरक्षा और युद्ध

भारतीय थलसेना (Indian Army) भूमि बल है, जो राष्ट्रीय की सुरक्षा करती है। भारतीय थलसेना मुख्य कार्य राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा करना, बाहरी आक्रमण, आंतरिक खतरों से रक्षा करना, भारत की सीमाओं पर सैन्य कार्यवाही करती है, संकट के समय नागरिकों की सहायता करती है। थलसेना का सर्वोच्च कमांडर भारत के राष्ट्रपति होते हैं और इसकी कमान सेनाध्यक्ष (Chief of the Army Staff - COAS) संभालते हैं, जो थल सेनाध्यक्ष वर्तमान में उपेंद्र द्विवेदी हैं। भारतीय सेना दिवस हर साल 15 जनवरी को मनाया जाता है।

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भारतीय सेना का आधुनिक स्वरूप ब्रिटिश-काल के बाद विकसित हुआ। भारत की स्वतंत्रता के बाद 1947 से आज तक भारतीय सेना ने कई चुनौतियों का सामना किया है, सीमाओं की रक्षा अभियानों से लेकर शांति-स्थापना और आपदा राहत कार्य आदि। भारत-पाकिस्तान युद्ध जैसे 1947-48, 1962, 1965, 1971, कारगिल युद्ध आदि का सामना किया है।

भारतीय थल सेना में लगभग 12.5 लाख सक्रिय सैनिक और लगभग 9 लाख से अधिक आरक्षित सैनिक हैं। यह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी स्थायी सेना बनती है।

मुख्य भूमिका

  • सीमाओं की निगरानी और सुरक्षा।
  • आतंकवाद और विद्रोह रोधी अभियान।
  • प्राकृतिक आपदा में राहत और बचाव कार्य।
  • शांति मिशनों में योगदान।

संगठन और रैंक

थलसेना का ढांचा कमान-क्षेत्र, डिवीज़न और रेजिमेंट पर आधारित है। रैंक संरचना निम्न है:

सैनिक → नायक → नायब सूबेदार → सूबेदार → लेफ्टिनेंट → कैप्टन → मेजर → लेफ्टिनेंट कर्नल → कर्नल → ब्रिगेडियर → मेजर जनरल → लेफ्टिनेंट जनरल → जनरल

प्रमुख ऑपरेशन

  • 1947–48 : पाकिस्तान सीमा युद्ध
  • 1962 : चीन सीमा युद्ध
  • 1965, 1971 : पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन
  • 1999 : कारगिल युद्ध

भारतीय सेना प्रकार

  • भारतीय थलसेना (Indian Army)
  • भारतीय नौसेना (Indian Navy)
  • भारतीय वायुसेना (Indian Air Force)

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