भारत में अंग्रेजों का शासन लगभग 200 वर्षों तक चला। इसे तीन हिस्सों में बाँटा जा सकता है। इस आर्टिकल में हम भारत में अंग्रेज़ों के पूरे शासन को समझेंगे।
अंग्रेजों का शासन संक्षिप्त जानकारी
| वर्ष | विवरण |
|---|---|
| 1757 – 1858 | ईस्ट इंडिया कंपनी शासन |
| 1858 – 1947 | ब्रिटिश राज / क्राउन शासन |
| 1757 – 1947 | ब्रिटिश शासन (पूरा काल) |
| अंत | 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ |
भारत में ब्रिटिश शासन का इतिहास (1757–1947)
भारत का इतिहास बहुत पुराना और गौरवशाली रहा है। लेकिन 18वीं शताब्दी के मध्य में जब मुग़ल साम्राज्य का पतन हुआ तो भारत छोटे-छोटे राज्यों में बंट गया। इसी दौरान यूरोपीय व्यापारिक कम्पनियाँ भारत आईं। इनमें से ईस्ट इंडिया कंपनी ने धीरे-धीरे व्यापार के बहाने भारत पर राजनीतिक कब्जा किया और अगले 200 वर्षों तक भारत अंग्रेजों के अधीन रहा।
इतिहास विस्तार में पढ़ेंगे
हम इस पोस्ट में अंग्रेजों द्वारा भारत पर शासन काल के बारे में जानेंगे कब और क्या हुआ-
ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन (1757–1858)
ईस्ट इंडिया कंपनी 1600 ई. में महारानी एलिजाबेथ प्रथम ने स्थापित की थी, इसका मुख्यालय लंदन में था। ईस्ट इंडिया कंपनी को अलग अलग महाद्वीपों में व्यापार करने के लिये बनाया गया था। यह कंपनी भारत में भी व्यापर करने आई थी, शुरुआत में इसने व्यापार किया लेकिन राजनीति में हस्तक्षेप करने लगी और बाद में भारत पर शासन करना शुरू कर दिया।
प्लासी युद्ध (1757)
- युद्ध लड़ा गया: सिराजुद्दौला और ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ में हुआ।
- परिणाम: बंगाल पर ईस्ट इंडिया कंपनी का अधिकार, भारत में अंग्रेज़ी शासन की नींव रखी गई।
बक्सर युद्ध (1764)
- युद्ध लड़ा गया: ईस्ट इंडिया कंपनी और मीर क़ासिम, शुजा-उद-दौला और शाह आलम द्वितीय के साथ हुआ।
- परिणाम: ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी प्राप्त हुई।
प्रमुख गवर्नर-जनरल
- वॉरेन हेस्टिंग्स (1773–1785) – न्याय व्यवस्था में सुधार।
- कॉर्नवालिस (1786–1793) – स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement)।
- लॉर्ड वेलेजली (1798–1805) – सहायक संधि (Subsidiary Alliance)।
महत्वपूर्ण अधिनियम
- 1773: Regulating Act
- 1784: Pitts India Act
1857 का विद्रोह (प्रथम स्वतंत्रता संग्राम)
1857 का विद्रोह मेरठ से शुरू हुआ यह विद्रोह सैनिक असंतोष, आर्थिक शोषण और सामाजिक हस्तक्षेप के कारण हुआ था। झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे और बहादुर शाह ज़फर इसके प्रमुख नेता थे।
विद्रोह के कारण
- सैनिक असंतोष (कारतूस कांड)।
- आर्थिक शोषण।
- सामाजिक-धार्मिक हस्तक्षेप।
- भारतीय राजाओं और जमींदारों की नाराज़गी।
प्रमुख घटनाएँ
- मेरठ से शुरुआत (10 मई 1857)।
- दिल्ली में बहादुर शाह ज़फर को नेतृत्व।
- झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे, बेगम हज़रत महल का योगदान।
परिणाम
- ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त।
- 1858 में ब्रिटिश क्राउन ने सत्ता अपने हाथों में ले ली।
ब्रिटिश राज / क्राउन शासन (1858–1947)
1857 के विद्रोह के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त हुआ और भारत सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन आ गया। वायसरायों की नियुक्ति हुई और कई सुधार एवं अधिनियम बनाए गए। इसी काल में कांग्रेस की स्थापना और राष्ट्रीय आंदोलन शुरू हुआ।
भारत शासन अधिनियम 1858
- ईस्ट इंडिया कंपनी शासन समाप्त।
- वायसराय की नियुक्ति।
- रानी विक्टोरिया की घोषणा: धार्मिक स्वतंत्रता, भारतीयों से भेदभाव न करने का वादा।
प्रमुख वायसराय
- लॉर्ड कर्ज़न – बंगाल विभाजन (1905)।
- लॉर्ड रिपन – स्थानीय स्वशासन के जनक।
- लॉर्ड लिनलिथगो – भारत छोड़ो आंदोलन (1942)।
- लॉर्ड माउंटबैटन – भारत की स्वतंत्रता (1947)।
महत्वपूर्ण अधिनियम
- 1861: भारतीय परिषद अधिनियम।
- 1892: सीमित प्रतिनिधित्व।
- 1919: मोंटफोर्ड सुधार।
- 1935: भारत शासन अधिनियम (संविधान की नींव)।
स्वतंत्रता आंदोलन और संघर्ष
- 1885: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना।
- 1905: स्वदेशी आंदोलन।
- 1919: जलियांवाला बाग हत्याकांड, खिलाफत आंदोलन।
- 1920: असहयोग आंदोलन (गांधीजी)।
- 1930: दांडी मार्च और सविनय अवज्ञा आंदोलन।
- 1942: भारत छोड़ो आंदोलन।
- नेताजी सुभाषचंद्र बोस और आज़ाद हिंद फौज।
ब्रिटिश शासन का आर्थिक प्रभाव
- धन की निकासी (Drain of Wealth) – दादाभाई नौरोजी।
- कृषि पर अधिक कर → किसान निर्धन।
- भारतीय उद्योगों का पतन, ब्रिटिश वस्त्र उद्योग को लाभ।
सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव
- अंग्रेज़ी शिक्षा – मैकाले मिनट (1835)।
- प्रेस और आधुनिक सोच का विकास।
- सामाजिक सुधार आंदोलन: राजा राममोहन राय (सती प्रथा का अंत), विद्यासागर (विधवा विवाह), स्वामी विवेकानंद, दयानंद सरस्वती।
भारत की स्वतंत्रता और विभाजन (1947)
- द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटेन कमजोर हुआ।
- 1946 कैबिनेट मिशन।
- 15 अगस्त 1947: भारत स्वतंत्र हुआ।
- भारत और पाकिस्तान का विभाजन हुआ।
निष्कर्ष
भारत में ब्रिटिश शासन लगभग 200 साल तक चला। इस दौरान भारत ने शोषण और संघर्ष दोनों देखे। लेकिन इसी काल में राष्ट्रीयता की भावना जागृत हुई और 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ।
आज भी भारतीय राजनीति, शिक्षा, प्रशासन और क़ानून में अंग्रेज़ी शासन की छाप स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
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